सीटू ने दिया श्रमायुक्त के नाम ज्ञापन - Vanchit Awaaz

*सीटू ने दिया श्रमायुक्त  के नाम ज्ञापन*
*मालनपुर*=-सीटू के जिला उपाध्यक्ष देवेंद्र कुमार शर्मा ने बताया के 1 अप्रैल 2024 से लागू किए जाने वाले पुनरीक्षित न्यूनतम वेतन निर्धारण करने में हुई वैधानिक चूक दूर कर वर्ष 2019 से बड़ी हुई दरों का एरियल सहित भुगतान किया जाना चाहिए इसी को लेकर आज विकास भवन पर लगभग 3,15 पर श्रम पदाधिकारी के माध्यम से श्रम आयुक्त महोदय मध्य प्रदेश शासन को ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि मध्य प्रदेश वेतन अधिनियम 1948 की धारा 3 के अनुसार प्रत्येक 5 वर्ष के बाद न्यूनतम वेतन की दर पुनरिक्षित की जानी चाहिए प्रदेश में अनुसूचित नियोजनों हेतु पिछला न्यूनतम वेतन निर्धारण 10-10 2014 को मध्य प्रदेश राजपत्र में प्रशासन के जरिए हुआ स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के तहत वर्ष 2019 में पुनरीक्षण होना चाहिए लेकिन मध्य प्रदेश ने 4 वर्ष तक इसे लंबित रखा और इस पर कोई कार्रवाई नहीं की और मध्य प्रदेश शासन ने मजदूरों को नियमानुसार मिलने वाली बढ़ीं हुई मजदूरी से वंचित कर उन्हें  तबाह किया और प्रदेश के खरबपति नियोजकों को लाभ पहुंचाया प्रदेश सरकार द्वारा की गई इस आपराधिक कार्रवाई के खिलाफ हमारा संगठन लगातार आवाज उठाते हुए न्यूनतम वेतन में वृद्धि की मांग करता रहा हमारे संगठन ने प्रदर्शन धरने आयोजित कर दर्जनों ज्ञापन मुख्यमंत्री श्रम मंत्री श्रम आयुक्त को भेजें इसलिए श्रमिकों के असंतोष से बचने के लिए सरकार को मजबूरी में पुनरीक्षण प्रक्रिया तेज करनी पड़ी और 15 11 2019 को न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड की अनुशंसा ठीक है 1.10 2019 को प्रभावशील महंगाई भत्ते व मूल वेतन को जोड़कर इसमें 25% की वृद्धि कर नया मूल वेतन निर्धारित हो इसको मानकर केवल 1.10 2019 के मूल वेतन में 25% की वृद्धि कर सभी श्रेणी के श्रमिकों के हितों पर कोठारा घात कर नियोजकों का हित लाभ किया गया इस चालाकी  के कारण प्रत्येक श्रमिक को 437 रुपए मासिक का नुकसान हुआ ऐसी स्थिति में देय दिनांक से भुगतान दिनांक तक के एरियर्स का भी भुगतान होता है वर्तमान न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण में इस वित्त संवत वह मान्य परंपरा का खुला उल्लंघन कर इसे 1 अप्रैल 2024 से लागू करना स्पष्ट मजदूर विरोधी व नियोजन समर्थक अवैध करवाई है इस कदम से बीते 4 वर्ष 6 माह में मूल वेतन में की गई हेरा फेरी के औसत 437 रुपए तथा 1 10 2019 से तब के मूल वेतन में की गई 25  प्रतिशत वृद्धि को जोड़कर 313 2024 तक इसकी यदि 4 वर्ष 6 माह की गणना करें तो कुशल श्रमिक से 107352 रुपए अर्ध कुशल श्रमिक से 118908 रुपए कुशल श्रमिक से 137484 रुपए आते कुशल श्रमिक से 155024  रुपए की राशि हड़पी जा रही है उपरोक्त ज्ञापन सौंपते हुए हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि भारतीय श्रम सम्मेलन द्वारा न्यूनतम वेतन निर्धारण हेतु तय मापदंडों के लिहाज से वर्तमान में सभी केंद्रीय श्रमिक संगठनों की मांग 26000 रुपए न्यूनतम वेतन की है ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने अपनी मनमानी व्याख्याएं करने के बाद भी इन्हीं मापदंडों  को आधार बनाकर लगभग 8 वर्ष पूर्व वर्ष 2016 में सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के तहत 18000 रुपए का न्यूनतम वेतन मान्य का लागू किया था उपरोक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए तमाम वैधानिक गड़बड़ियों के साथ गणनागत चुके की गई है इसलिए ज्ञापन के माध्यम से उठाए गए मुद्दों व  मांगों का शीघ्र निराकरण किया जाए ज्ञापन देने वालों में सीटू  जिला उपाध्यक्ष देवेंद्र कुमार शर्मा जिला कोषाध्यक्ष उदय सिंह श्रीवास हरगोविंद जाटव श्रीलाल माहौर लायक राम कुशवाह रामावतार गौड रिंकू गुर्जर जसवंत श्रीवास आदि शामिल थे

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